Text selection Lock by Hindi Blog Tips

रविवार, 1 मई 2011

shehar


मन कीं इन सभ्यताओ में 
है अब भी कुछ कही दबा हुआ सा 
बहुत सारे मुहनजोद्रो और हड़प्पा 
बसे हुए है या छुपाये है इन  टीलो के नीचे 
रोज बाहर आने को आतुर है वो शहर और वो लोग 
अकेले में इनकी खुदाई  होती है कभी कभी 
 हर बार कुछ न कुछ मिलता है गायब वहां पर 
डर लगता धीरे धीरे पूरी सभ्यता जीवाश्म न बन जाये 
फिर मांगने पड़ेगा ये सब वहां से, 
जहाँ जहाँ भी उम्मीद है इनके मिलने की
 बस रहे है नित नए शहर  इन पर, इसीलिए तो 
बड़ा मुश्किल है कुछ ख़ास सभ्यताओ को बचाना 
पर कहते  है कि जीवाश्म से ईंधन बनता है 
नयी पीढ़ी के कुछ कम आयेंगे ये मेरे शहर   

कोई टिप्पणी नहीं: