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शनिवार, 21 मई 2011

hansee

हंसी के प्रकार 

मोहल्ले की रामलीला में 
सुनी और देखी है  कई तरह की  हंसी 
एक तो राम और रावण जैसी (हा हा) और 
दुसरी ऐसी जैसे की हंसी का  
कर लिया हो अपहरण किसी रावण ने (ही ही ही )
 देखा है कई बार ऐसा होते हुए अपने घर में भी 
पापा, भैया, दादा दादी हँसते तो घर हा हा से गूंज जाता 
पर दादी के सामने माँ, और माँ के सामने भाभी 
हंसती है तो हंसी की आवाज़ घूँघट में ही शरमा जाती 
पर अकेले में कभी कभी वो भी खिल के हंसती है तो 
रामलीला की अशोक वाटिका में  फुल खिल रहे होते थे 
और हमारे चाचा तो सभी तरह की हंसी हँसते थे
 हा हा, ही ही, हे हे, और हो हो 
मोहल्ले की राम लीला में राक्षस का रोल जो करते है चाचा
और चाची सूर्पनखा बनती है बिना नाक कटाए  
पर भाभी का छोटा मुन्ना तो रोता हो हो  करके 
ओर हँसता है तो प्यार से  हे हे करता है  
पर गुडिया मुन्ने से बड़ी है, मुस्कुराती ज्यादा है 
 आजकल स्कूल जाने लगी है , 
समझदार हो गयी है इसलिए हंसती कम है 
सुना है उसने
उस दिन भाभी बड़ी रोई थी और माँ उदास थी 
पर अब दादा, दादी तो रहे  नहीं
पापा,चाचा और भैया तो अब भी वैसे है 
पर माँ बदल गयी और उनकी हंसी भी 
पर भाभी अभी ही पहले जैसी है 
बदलने में वक़्त लगता है न, परन्तु  
सुना है और देखा है मायके में भाभी को 
अपने पापा की गुडिया बनते हुए 
और ससुराल की हंसी को मायके की बनाते हुए 
जैसे की राम, सीता को जीत के लाये हो वापस अयोध्या में 





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