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शनिवार, 7 मई 2011

failed revolution

 एक असफल क्रांति 

जाने  वो भी क्या दिन थे 
जब हम भी कुछ कुछ दीवाने थे                         
करते कुछ थे, होता कुछ था 
फिर भी अपने पर बड़ा गुमां था 
सोचा था मिल के दुनिया बदल देंगे 
अंदरखाने कई कास्त्रो,चे और भगत जवां थे
खूब गुरिल्ला लड़ाई लड़ते थे   
पर है दुनिया का दस्तूर..... और धीरे धीरे 
 दुनिया कम्युनिस्ट से केपिटलिस्ट हो गयी
और..फिर ऐसी बदली कि.....  
खासमखास भी , खट्टे मीठे आम हो गए 
और इतिहास में दूसरी बार.... हाँ हाँ दुसरी बार   
 सोवियत संघ के तेरह टुकड़े हो गए 
 सारे कोमरेड, शामो-शाम  फ़कीर होने लगे और    
 भगत, कास्त्रो और चे  अपनी मौत मरने लगे
पर सुना है कि मार्क्स बाबा ने कहा था 
 एक दिन केपिटलिस्म अपनी मौत मरेगा 
और फिर सोवियत संघ फिर से एक हो जायेगा
नहीं तो दिल बहलाने का बहाना अच्छा है कि
असफल क्रान्तिया ही साची (सच्ची) और महान होवे है! 





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