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बुधवार, 27 जुलाई 2011

homogeneity

ये लोग, वो लोग, सभी लोग 
है मेरे साथ फिर भी मैं अकेला हूँ
कभी इनकी , कभी उनकी,  सुनता सबकी 
पर फिर भी मैं स्पीच्लेस हूँ 
धरती के साथ साथ रोज चक्कर लगा रहा हूँ 
पर फिर भी कई सालो से एक जगह पे अटका हूँ 
क्योंकि कोई चिंगारी लगाने वाला नहीं है
और  बातों के ढेर पे बैठा हूँ  मैं,
जिस दिन ये बारूद फटेगा
जल के इसमें एक नयी रचना होगी
राख के उस ढेर में मेरे, उनके सबके अवशेष होंगे
पर ढूंढना और पहचान करना बड़ा ही मुश्किल होगा
अच्छा है सभी एक जैसे हो जायेंगे







शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

mission moon

चाँद पे रहते है लोग 
अच्छे भी और बुरे भी
रात की रूमानी रोशनी में गौर से देखो तो 
कुछ लोगो को दिखते है 
कभी कभी आते है यहाँ सैर करने, घुमने 
खूब चाँद की बाते बताते है  
यहाँ की सुनते है  और एक दिन 
फिर वो ही अमावस के दिन चले जाते
कहते है कि तुम लोग बड़ा अँधेरा रखते हो
और हमें अँधेरे से सख्त नफरत है,
 गुस्से में कहते है कि  
हमारे चाँद में ऐसा नहीं है
वहां तो  चांदनी नाम की एक लडकी है
जिसके रूप के तेज से सब कुछ रोशन है 
ये अमावस, पूनम तो तुम्हारे यहाँ होती है
वहम है तुम लोगो का, मन बहलाने के लिए 
चांदनी रूठे तो काली अमावस नहीं तो पूनम  
चाँद वालो की बाते सुन कर सोचता हूँ
फिर ये 116 चाँद की रातों का चक्कर क्या है    
पता नहीं चाँद की जमीन कैसी होगी 
पहाड़ होंगे कि रेगिस्तान होगा पर 
सुना है वहां के लोग हवा में उड़ते है 
इधर से उधर जिधर मन किया 
और जिधर की हवा चले, चले जाते है 
कोई जुडाव नहीं सिर्फ और सिर्फ उड़ाव 
पहले तो वहीं से लोग आते थे 
अब विज्ञान की तरक्की  से 
हमारे यहाँ के  कुछ लोग भी कभी कभी 
चाँद पे चले जाते है
पर वापस आके वहां की असल बात कोई नहीं बताता 
 चांदनी की तारीफ करते रहते है 
और अजीब सी मदहोशी में सूफियाना मस्त हो जाते है
चाँद कैसा है और वहां के लोग कैसे है 
ये नहीं बताते, शायद मिले हुए है चाँद वालो से 
जिस दिन मै जाऊंगा 
सब कुछ पता करके आऊंगा 
या क्या पता मैं भी? 


Dedicated to Neha jee...


शनिवार, 2 जुलाई 2011

गली, मोहल्ले

गली, मोहल्ले


 बंद गली में बंद हूँ 
जाने का रास्ता है तो है 
पर निकलने का नहीं 
पर चुनी तो खुद ही, ये गली 
मैंने भी और बाकि सबने भी 
गली के उस पार, है बहुत से लोग
अपने भी, पराये भी और कुछ जाने पहचाने अनजान  
वो सब भी बंद है अपनी अपनी गलियों और मुहल्लों में 
 उनकी गली भी मेरी तरह है (मुहल्ले वाले तो खुश है ना )
हांजी हाँ बंद है एक तरफ से 
मन करता है, मिलना है  उनसे, बाते  करनी है  
कम्युनिकेसन का युग है आजकल, और फिर 
मैं भी सामाजिक हूँ न 
हूँ भी  या फिर गली की घुटन का असर है 
पर गलियों के भी अपने रूल रेगुलेशन है 
कोई इधर वाला उधर नहीं होता  
दिखने में बाहर से तो गलिया बंद है
पर मन के मोहल्ले मिले है आपस में 
पता नहीं कोन कहाँ का, और किसका 
अतिक्रमण कर चुका है, या कर रहा है  
बाहर से देख के लगता है 
एक सीजफायर सी स्थिति है 
जहाँ हर कोई अपनी अपनी गली के मोर्चे पर मुस्तैद खड़ा है 
पर मन से कहीं और मिला हुआ है
कहाँ ? ये तो गली वाले ही जाने.... 
अरे गली में कुछ खिडकिया ही खोल लो..... 
हवा आये ताजी इधर उधर....



तभी गली में गुलजार का लिखा गाना बजा.... 

रात के ढाई बजे....कोई शहनाई  बजे....दिल का बाजार लगा 
दिल ने कैसी दुर्गत की....पहली बार मुहबब्त की है
 अजी आखिरी बार मुहब्बत की है (गुलज़ार साहब  भी तंग आगये है)