गुस्ताखी माफ़
पुरातन ज़माने में होता था कि राजा महाराज या काजी न्याय के लिए लिए अपना न्याय दरबार लगाते थे और दोनों पक्षों की बाते सुन सुनाकर कर उनके वाद विवाद का निपटारा वहीँ हाथो हाथ कर देते थे यानि कि on the spot justice हो जाता था!
ऐसा ही एक समुदाय है जो वैसे तो हाल-चाल, वेश भूषा से हाई फाई आधुनिक है परन्तु उनके क्रिया कलाप और समय के बारे रिसर्च जारी है! इस समुदाय को देश में इलेक्ट्रोनिक मीडिया कहा जाता है यानि कि न्यूज़ को टीवी पे दिखाने वाले लोग और उनकी पुरी जमात! जनता की आवाज़ के नाम पर इनको हर शाम को कोई न कोई बकरा चाहिए हलाल करने के लिए, भले ही उस बेचारे पे आरोप साबित हुए या नहीं हुए इससे इनको फर्क नहीं पड़ता! इन्होने तो अपना कोर्ट बिठा देना है जिसे अच्छी अंगरेजी में मीडिया ट्रायल कहते है इसमें इनका एक धुंआधार,खूंखार एंकर होता/होती है जो केस को सबके सामने रखता है और इनका साथ देने वाले रोज के वो जाने माने एक्सपर्ट जो दुनिया के किसी मुद्दे पर अपनी राय ऐसे देते है जैसे की एक्सपरतीज की हर हर गंगा उनके घर से ही निकलती है! और ये सब मिलकर किसी को अपराधी या मासूम साबित कर देते है कम से कम एक पोपुलर ओपीनियन तो बना ही देते है!
ऐसा ही एक समुदाय है जो वैसे तो हाल-चाल, वेश भूषा से हाई फाई आधुनिक है परन्तु उनके क्रिया कलाप और समय के बारे रिसर्च जारी है! इस समुदाय को देश में इलेक्ट्रोनिक मीडिया कहा जाता है यानि कि न्यूज़ को टीवी पे दिखाने वाले लोग और उनकी पुरी जमात! जनता की आवाज़ के नाम पर इनको हर शाम को कोई न कोई बकरा चाहिए हलाल करने के लिए, भले ही उस बेचारे पे आरोप साबित हुए या नहीं हुए इससे इनको फर्क नहीं पड़ता! इन्होने तो अपना कोर्ट बिठा देना है जिसे अच्छी अंगरेजी में मीडिया ट्रायल कहते है इसमें इनका एक धुंआधार,खूंखार एंकर होता/होती है जो केस को सबके सामने रखता है और इनका साथ देने वाले रोज के वो जाने माने एक्सपर्ट जो दुनिया के किसी मुद्दे पर अपनी राय ऐसे देते है जैसे की एक्सपरतीज की हर हर गंगा उनके घर से ही निकलती है! और ये सब मिलकर किसी को अपराधी या मासूम साबित कर देते है कम से कम एक पोपुलर ओपीनियन तो बना ही देते है!
क्योंकि पूरी दुनिया पे ये लोग एक खास हक के साथ सवाल उठाते है जबकि इन पर कोई सवाल नही उठाता है जबकि इनकी खुद की क्रेडिबिलिटी दिनों दिन गिरती जा रही है! देश के किसी भी मीडिया हॉउस में रिक्रूटमेंट की कोई पारदर्शी पोलिसी नही है न ही उनके रियल मालिको का पता है, ब्लैक और वाईट मनी,पेड़ न्यूज़,कोपोरेट लोब्बिंग जेसे कई आरोप इनपे लगते रहते है! इन सीरियस मुद्दों के बाद भी जिस फ्रीडम ऑफ़ एक्स्प्रेस्न का सहारा ये लेते है थोडा सा हम भी ले लेते है!
अपनी टीवी न्यूज़ मीडिया की ऐसी ही कुछ अदालतों और उनके खूंखार, जाने माने एंकरों का कुछ विश्लेष्ण किया है टीवी पर देख देख कर (हो सकता है असलियत कुछ और हो) उनकी कार्य प्रणाली,अंदाज़ और हाव भाव पर कुछ टिप्पणिया की गयी है जरा शौक फरमाए-
अर्नब गोस्वामी (Times Now) - अर्नब साहब रोज रात को अपनी अदालत (The news hour) इतनी तेजी और हार्ड हिटिंग तरीके से चलाते है जैसे की थोडा सा भी अगर हमने मिस कर दिया तो गोस्वामी वही बेठे बेठे हमारी सजा मुकर्र कर देंगे! एहसास करवाते है कि किसी भी मुद्दे पर इनकी बहस ही अंतिम होगी! और इनका फैसला भी अंतिम होगा! इसी आदत के कारण प्रधानमंत्री की प्रेस मीटिंग में पीम के मीडिया सलाहकार हरीश खरे से डांट भी खाई! फिर भी इंग्लिश मीडिया का बेबाक चेहरा, इन्होने NDTV और CNN IBN की मोनोपोली खत्म की है!
बरखा दत्त (Ndtv)- Buck stops here मदाम जी अब बक (दर्शक) यहाँ नहीं रुकता) और
We the people -ये कोनसे लोगो के लिए आप शो कर रही है पता ही नहीं चलता....
वैसे आपकी भी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी इतनी आलोचना के बाद भी पूरी........के साथ टिकी हुई है और हर शाम को उसी जोश के साथ अपने बक के साथ आ जाती है! एक बात और है जो लोग आपकी सफलता से चिढ़ते थे वे लोग मौसम का पूरा फायदा उठा रहे है! और सारी खुन्नस निकाल रहे है! कुछ दिन सन्यास ले लो !
प्रनोय राय(Ndtv Group)-इन डॉक्टर साहब को अपने चेनलो का इलाज करना चाहिए नही तो.....वैसे अब अप्रासंगिक हो गये है होना, नही होना कोई फर्क पड़ता, दुनिया आगे बढ़ चली है! कभी इंडियन न्यूज़ इंडस्ट्री में बड़ी इज्जत थी! देश में इलेक्ट्रोनिक मीडिया के शुरुआती लोगो में से एक है!
विनोद दुआ-(Ndtv)(मनोरंजन भारती के "दुआ साब")- किसी ने सही कहा था इनके लिए, ये पत्रकार नहीं ब्रोडकास्टर है!शायद रवीश कुमार के साथ अकेले है जिनके अपने नाम पे 15 मिनट का शो(महफिल) है, जबरदस्त टिप्पणीकार है बोलते भी शानदार है! हमेशा सुरूर में लगते है.............. बाबा की जय हो!
विनोद दुआ-(Ndtv)(मनोरंजन भारती के "दुआ साब")- किसी ने सही कहा था इनके लिए, ये पत्रकार नहीं ब्रोडकास्टर है!शायद रवीश कुमार के साथ अकेले है जिनके अपने नाम पे 15 मिनट का शो(महफिल) है, जबरदस्त टिप्पणीकार है बोलते भी शानदार है! हमेशा सुरूर में लगते है.............. बाबा की जय हो!
करण थापर(devil's advocate)- इनको लड़ते देख ऐसा लगता है कि अच्छा हुआ हमे इंग्लिश कम ही समझ में आती है! वैसे सही नाम है शो का, इन्हें तो वकील ही होना चाहिए! फिर भी टीवी पे कम ही आते है इसीलिए लोग सुनते है और देखते है! अपने हर शो से एक ब्रेकिंग न्यूज़ निकाल देते है!
राजदीप सरदेसाई (Cnn Ibn)- इनकी तो सारी जिन्दगी की कमाई Cash in parliament वाले मामले में चली गयी है रही सही कसर इनकी इन्तेलेक्चुल वाईफ (सागरिका घोष) अपने शो और डिबेट से पुरी कर देती है! इंडियन मीडिया के पोस्टर बॉय, राडिया कांड में नाम आने के बाद भी लोगो इनसे उम्मीद है अभी भी अंदर का जर्नलिस्ट जिन्दा लगता है! पता नहीं है या नही?
रजत शर्मा(India tv)-इन्होने कोनसे कॉलेज से पत्रकारिता पढी है उस पर लोग रिसर्च करने में लगे है किसी को कुछ समझ में नही आ रहा है! वैसे इनको इस बात का श्रेय है की हजारो लोगो को इन्होने जरनेलिस्म छुडवा दिया है और लाखो करोड़ो को ये भुलवा दिया कि न्यूज़ किस चिड़िया का नाम होता है! इनका नाम भी इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा!
पुण्य प्रसून वाजपयी(Zee News)-ज़ाहिर है , बड़ा सवाल ये है की.... हाथो को मसलते हुए कितने सालो से एक ही टेक में अटके हुए है रोज सेमिनारो,ब्लोग्स और अखबारों में उसी मीडिया को गाली देते है और उसी में बने हुए है ! बाबा कुछ नया करो!
पुण्य प्रसून वाजपयी(Zee News)-ज़ाहिर है , बड़ा सवाल ये है की.... हाथो को मसलते हुए कितने सालो से एक ही टेक में अटके हुए है रोज सेमिनारो,ब्लोग्स और अखबारों में उसी मीडिया को गाली देते है और उसी में बने हुए है ! बाबा कुछ नया करो!
प्रभु चावला(New Indian Express)-जब हम लोग छोटे होते थे तो इंडिया टुडे के पेज पर इनका नाम पढकर सोचते थे की देश का कितना बड़ा इन्तेलेक्चुअल होगा ये आदमी,और जब पहली बार आज तक पे देखा तो सोचने लगे, ये इंडिया टुडे छपती कैसे थी यार? मीडिया के अमर सिंह कह सकते है इनको!
संजय पुगलिया(CNBC Awaaz)-पढ़े लिखे समझदार एडिटर लगते है काश इनके जैसे एडिटर सभी हिंदी चेनलो को नसीब होते! कम से कम ये स्योर तो है इनके चेनल पर क्या चलेगा!
पंकज पचोरी(Ndtv)-इनको आंकड़ो से बहुत प्यार है! बोलते बोलते कुछ भूल जाते है! अच्छे टीवी पत्रकार है!
विक्रम चन्द्र(Ndtv)-इन साहब की बिग फाईट से मजेदार तो WWF की नुरा कुश्ती होती है, टेक गुरु भी है!बड़ी इच्छा है किसी दिन धुल भरे रिमोट एरिया में बिना एसी के रिपोर्टिंग करते देखू ! ये तो पैदायसी सेलेब्रिटी जर्नलिस्ट लगते है!
रवीश कुमार (Ndtv)- टीवी के सबसे क्रेदिब्ल चेहरों में से एक है और आजकल पत्रकारिता को मजे ले ले के कर रहे है खूब व्यंग्य कर रहे है ....पर देख कर मजा आता है! लगे रहो इसी तरह ....
वैसे बरखा कांड के बाद NDTV के दुसरे पत्रकारों की तरह इन पर भी हमले हो रहे है! लोग स्टेंड तो पूछेंगे.......बड़े पत्रकार जो हो!
आशुतोष(Ibn-7) - ये और इनके जैसे कई ईलेक्टोनिक मीडिया क्रांति के बाई प्रोडक्ट है! अच्छे एंकर है पर आगे कुछ नही...दिनों दिन लोकप्रियता गिरती जा रही है!
दीपक चोरसिया (Star News)-ये तो पत्रकार कम पान वाले ज्यादा लगते है पीपली लाइव में सही दिखाया है इनको.....स्टार वाले क्यों एंकरिंग करवा रहे है, रिपोर्टिंग फिर भी लोग झेल लेते है!
अभिज्ञान प्रकाश और अभिसार शर्मा -इन दोनों को टीवी की आवाज म्यूट करके देखो या साउंड करके कोई फर्क नहीं पड़ता,इनको बोलना है क्या बोलना है ये पता नही? पर आवाज़ दोनों की अच्छी.....पर हमेश एक जैसा साउंड करते है!
दीपक चोरसिया (Star News)-ये तो पत्रकार कम पान वाले ज्यादा लगते है पीपली लाइव में सही दिखाया है इनको.....स्टार वाले क्यों एंकरिंग करवा रहे है, रिपोर्टिंग फिर भी लोग झेल लेते है!
अभिज्ञान प्रकाश और अभिसार शर्मा -इन दोनों को टीवी की आवाज म्यूट करके देखो या साउंड करके कोई फर्क नहीं पड़ता,इनको बोलना है क्या बोलना है ये पता नही? पर आवाज़ दोनों की अच्छी.....पर हमेश एक जैसा साउंड करते है!
राहुल कँवल(Headlines Today)-ये तो अर्नब, राजदीप आदि के पयिरेतेद वर्जन है! दोनों को कॉपी करने की कोशिस करते है ज्यादा गुन्जायिश नही है!
अशोक श्रीवास्तव (DD News)-अच्छे एंकर है और बहुत अच्छे से जानते है सरकारी चेनल में कैसे काम किया जाता है दूरदर्शन की पहुँच के कारण देश के कई बड़े एंकरों की तुलना में ज्यादा लोगो तक पहुँच पाते है!
निधि कुलपति,नीलम शर्मा और अलका सक्सेना-नीलम शर्मा और अलका जी तो अपने पे मोहित है दुनिया जाये भाड़ में...... निधि जी को सुनना अच्छा लगता है!
अनुराधा प्रसाद(News 24)- ये मेडम तो किसी मातम वाले परिवार से भी क्रिकेट का सवाल पूछ सकती है! और फिर माहोल हल्का करने का क्रेडिट भी ले सकती है! विश्वास नही होता, ऐसे लोग भी एडिटर होते है! फिर इनके मातहत कैसे होंगे भगवान जाने?
किशोर अजवानी(Star News) -इनको मीडिया में भर्ती किसने किया था उसको ढूंढो....ये अगर न भी हो तो कोई खास फर्क नही पड़ने वाला!
सुधीर चोधरी(Live India)-ये तो रजत शर्मा वाली परम्परा आगे बढ़ा रहे है क्योंकि पहले साथ साथ में खबरे फोड़ते (ब्रेकिंग न्यूज़) थे आज कल उसी राह पे चेनल भी चला रहे है!
संदीप चोधरी (मुद्दा, IBN-7)- ये इतना चिल्लाते क्यों है? पता नहीं....ऐसा तो नहीं थोथा चना बजे घणा!
ये कुछ खास और ज्यादा नजर आने वाले इलेक्ट्रोनिक मीडिया के चर्चित चेहरे है जिनको हम लोग रोज टीवी पर देखते है, हो सकता है कि सब लोग इनके बारे में उपर लिखी हुई बातो से इतेफाक नही रखते हो परन्तु फिर भी टीवी के एक कट्टर दर्शक होने के नाते कुछ फ्रीडम ऑफ़ एक्स्प्रेस्न तो ले ही सकते है! डेमोक्रेसी है भाई लोगो .......गुस्ताखी माफ़ करना!
शम्स ताहिर खान (Aaj tak)-जुर्म, वारदातों के बेताज बादशाह.....आवाज़ बढ़िया!
सईद अंसारी (News 24)- इतने साल से टीवी में चिल्ल पों कर रहे है पर डाउट है की लोग अभी भी सीरियासिली लेते होंगे!
सईद अंसारी (News 24)- इतने साल से टीवी में चिल्ल पों कर रहे है पर डाउट है की लोग अभी भी सीरियासिली लेते होंगे!
श्वेता सिंह(Aaj Tak))-क्या है ये और क्यों है ये समझ ही नही आता....किसी मीडिया सर्वे ने सबसे ग्लेमरस चेहरा बता दिया है! मेरी इस लिस्ट में क्यों है ये मुझे भी पता नही!
ये कुछ खास और ज्यादा नजर आने वाले इलेक्ट्रोनिक मीडिया के चर्चित चेहरे है जिनको हम लोग रोज टीवी पर देखते है, हो सकता है कि सब लोग इनके बारे में उपर लिखी हुई बातो से इतेफाक नही रखते हो परन्तु फिर भी टीवी के एक कट्टर दर्शक होने के नाते कुछ फ्रीडम ऑफ़ एक्स्प्रेस्न तो ले ही सकते है! डेमोक्रेसी है भाई लोगो .......गुस्ताखी माफ़ करना!
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