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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

प्यार और क्रांति के "बाई प्रोडक्ट"



विरोध करना आसान है
किसी व्यवस्था को चलाने या सुधारने  से
जैसे जुदा होके अमर हो जाना आसान है
एक दुसरे का हमेशा साथ निभाने से
हम ऐसा करते, हम वैसा करते
सब बातें और मन का मक्खन है, और कुछ नहीं
क्योंकि कुछ कर लिए होते तो
हीर- राँझा,लैला- मजनू आदि,    आदि मानवों
के वंश आज तक चल रहे होते और
दुनिया के नक़्शे का लाल रंग कमजोर नहीं होता
अमर प्रेम और क्रान्तिया अपने मूल स्वरूप में
उतनी ही पवित्र और सत्य विचार है जितना एक बच्चे की हंसी
पर इनके पूर्ण फलीभूत होने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं
एक प्रोसेस से जब इनको पड़े गुजरना तो इन सबका
संधि विच्छेद हो जाता है और
कई पूर्व कोमरेड, कवि और शायर 
"बाई प्रोडक्ट' के रूप में समाज में
 यहाँ वहां विचरित हो जाते है 
इसलिए सौ बातों की एक बात
दिल को बहलाने  का ख्याल अच्छा है ग़ालिब
और तो और  साहिर साहिब भी ये ही लिखते है
"कभी-कभी........ मेरे दिल में....... ख्याल आता है" (फिल्म-कभी कभी)





नोट- उक्त लिखित लेखन-स्वर्ग लोक में भगवान इन्द्र के  "पृथ्वी पर प्यार और क्रांति-एक विवेचना" नाम के सेमीनार के कुछ अंश उनकी अनुमती लेकर इस ब्लॉग पर प्रकाशित किये जा रहे है!ध्यान रहे ये भगवान इन्द्र के निजी विचार है!