Text selection Lock by Hindi Blog Tips

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

दुनिया का "बॉल-बेयरिंग"


दुनिया कुछ सर फिरे लोगो से चलती है
दुनिया कुछ जुनूनी लोगो से भागती है
और दुनिया कुछ समझदारो से एक जगह रूकती है

फिर वोही जुनूनी और सर फिरे लोग समझदार हो जाते है
और देश में लोकतंत्र स्थापित हो जाता और संधिया हो जाती है
और इतिहास के प्रोफेसरों का काम बढ़ जाता है 

नए सिरफिरे जुनूनी मजनू, रांझे, चे, भगत और कबीर
पैदा होने लगते है अपने अपने पागलपन के साथ
पर देश समाज की वो ही प्रक्रिया
फिर उनमे से किसी को महान, भगवान् और अंत में समझदार बना देती है
और बेचारी दुनिया फिर रुक जाती है
हालांकि चलना दुनिया की नियती और मजबूरी है 

आजकल दुनिया रुकी हुई है
लगता है इसको चलाने  वाले "बॉल- बेयरिंग" में कोई खराबी आ गयी है
अगर विश्वास न हो तो "गूगल अर्थ " पर जा के चेक कर लो.   
   

सतहीपन 


सतही, सतही और सतही
आजकल ये शब्द इतना अच्छा लगता है कि 
जैसे सबसे "कंटेपररी" शब्द ये ही है
और दुनिया कि हर आदमी और परिस्थिती पर 
ये शब्द सटीक बैठता है क्योंकि 
सब कुछ सतही है इस दिमाग, और इस दुनिया में 
क्योंकि अपना दिमाग ही, अपनी अपनी दुनिया है ना 
इतना सतही कि थोडा खोदो तो.
 नीचे विचारो और रिश्तो का सीवरेज बह रहा होता है 
परन्तु ये ही चीजे गहरी होने पर प्राकृतिक संसाधन बन जाते है 
जिनको आने वाली पीढ़िया "माइनिंग" द्वारा खोदेगी 
और उम्मीद ही कि कुछ "वेल्यूबल" बन के निकलेगा