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गुरुवार, 5 मई 2011

osama

ओसामा तुमरे बिन 

ओसामा तुम चले गये सबको अकेला  छोड़कर  
वहां जहाँ तुम ही कहते थे कि एक जन्नत है 
कई लड़ाके और दुनिया भर के कई मासूम 
उस जन्नत में तुम्हारे कारण पहुचे थे 
तुम बताना हमें ये जन्नत कैसी है 
तुम हमेशा बाते बहुत कहते थे 
ऊँगली ऊंची कर कर के  
ऑडियो विडियो में जब बोलते थे 
सुनती,देखती थी  थी दुनिया पूरी
तुम से ज्यादा तुम्हारे टेप चलते थे
अरबी में  तुम्हारी  वो आवाज़ कानो को भाती थी
लगता था क्रांति की भाषा ऐसी ही होती है 
 क्रांति आसानी से समझ  में नही आती है न 
पर जोर्ज बुश की अंग्रेजी से तो अच्छी  थी  
 चलो कोई बात नहीं 
जहाँ तुम चले गये देखना वहां चे और सद्दाम  भी होंगे
 वो भी ऐसे ही गए तुम्हारी तरह 
दुश्मन तुम  सबका एक था पर और रहेगा  
पर लड़ाई चे की, तुम लोगो से अलग थी 
पर अब अल जजीरा, सीनेन और बीबीसी  वाले क्या करेंगे
ये बेचारे  कई कई दिन तक 
तुम्हारी बातो के मतलब निकालते थे 
तुम्हारे होने ना होने पर बहस करते, लड़ते पूरा जोर लगाके
और तुम मजे से बैठ के देखते थे न उनको, मुझे पता है  
चलो कोई बात नहीं 
 अब उन्हें  कोई नया ओसामा बनाना पड़ेगा 
पर वो इतना आसान थोड़े ही है
तुम्हे तो सब पता है 
कितना पैसा और ऊर्जा लगती है ( ऊर्जा को तेल पढ़े)
पर ये लोग तो माहिर है इसमें 
बना देंगे फिर कोई नया  ओसामा
पहले भी खूब इन्होने बनाये है 
और फिर  इनके सारे गुनाह तो माफ़ है 
तुम  चिंता मत करो इस बात की 
बाय बाय ओसामा याद आओगे सबको कभी कभी 
हर साल सितम्बर के महीने में!





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