विश्वास और आस्था के प्रतिमान
एक दिन में ध्वस्त हो गये,और नास्तिकता
पूर्ण आस्था के साथ विद्यमान हो गयी
परन्तु सम्पूर्णता के खंडन का दौर अभी भी जारी है
और खंडो के इन अणु,परमाणुओ से शहर बदल गया है
क्योंकि बिना तालिबान के ही बरसो बरस पहले
बामियान के बुद्धा को तोड़ दिया गया था
तभी धीरे धीरे समझ आने लगा कि
क्यों एक दिन मार्क्स बाबा ने कहा था कि
धर्म और आस्तिकता अफीम के नशे की माफिक है
इसी से एक नया सिद्धांत निकाला है कि
एक प्रकार के आस्तिकता रुपी बिलों
से निकलने वाले जहरीले सांप
उजाड़ने का काम ही करते है
भले ही वो शहर हो, धर्म हो या एक आदमी
और इसके लिए तालिबान(अपने बुरे रूप में) की जरुरत नहीं है
एक अकेला तबलीग ही काफी है......
जो विचारो और भावनाओ को अफीम में तब्दील कर दे
एक दिन में ध्वस्त हो गये,और नास्तिकता
पूर्ण आस्था के साथ विद्यमान हो गयी
परन्तु सम्पूर्णता के खंडन का दौर अभी भी जारी है
और खंडो के इन अणु,परमाणुओ से शहर बदल गया है
क्योंकि बिना तालिबान के ही बरसो बरस पहले
बामियान के बुद्धा को तोड़ दिया गया था
तभी धीरे धीरे समझ आने लगा कि
क्यों एक दिन मार्क्स बाबा ने कहा था कि
धर्म और आस्तिकता अफीम के नशे की माफिक है
इसी से एक नया सिद्धांत निकाला है कि
एक प्रकार के आस्तिकता रुपी बिलों
से निकलने वाले जहरीले सांप
उजाड़ने का काम ही करते है
भले ही वो शहर हो, धर्म हो या एक आदमी
और इसके लिए तालिबान(अपने बुरे रूप में) की जरुरत नहीं है
एक अकेला तबलीग ही काफी है......
जो विचारो और भावनाओ को अफीम में तब्दील कर दे
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