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गुरुवार, 28 नवंबर 2013

दुनिया का "बॉल-बेयरिंग"


दुनिया कुछ सर फिरे लोगो से चलती है
दुनिया कुछ जुनूनी लोगो से भागती है
और दुनिया कुछ समझदारो से एक जगह रूकती है

फिर वोही जुनूनी और सर फिरे लोग समझदार हो जाते है
और देश में लोकतंत्र स्थापित हो जाता और संधिया हो जाती है
और इतिहास के प्रोफेसरों का काम बढ़ जाता है 

नए सिरफिरे जुनूनी मजनू, रांझे, चे, भगत और कबीर
पैदा होने लगते है अपने अपने पागलपन के साथ
पर देश समाज की वो ही प्रक्रिया
फिर उनमे से किसी को महान, भगवान् और अंत में समझदार बना देती है
और बेचारी दुनिया फिर रुक जाती है
हालांकि चलना दुनिया की नियती और मजबूरी है 

आजकल दुनिया रुकी हुई है
लगता है इसको चलाने  वाले "बॉल- बेयरिंग" में कोई खराबी आ गयी है
अगर विश्वास न हो तो "गूगल अर्थ " पर जा के चेक कर लो.   
   

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