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रविवार, 4 सितंबर 2011

अंतर्द्वंद

बातों का क्या है 
ये कह दिया और वो कह दिया
उनको और इनको 
पर मेरी ही बात मुझसे कहे, तू क्या है?
और क्या तेरी बिसात....
 मैं विश्वास तुझ पे करू
सच्चा तुझे मानू या झूठा 
बात की बातें सच्ची है
 मैं कुछ नहीं 
ना मेरी कोई औकात और ना कोई बिसात
एक निमित मात्र सा प्राणी मैं
अपनी दुनिया का अकेला वासी 
जो इसके केंद्र में भी और परिधि में भी 
अपकेन्द्रिय और अभिकेन्द्रीय बलों दोनों के जद में
गतिज भी और स्थतिज भी
बात की बातों की तरह
कभी उलझा और कभी सुलझा 
मन करे तब दुसरो की दुनिया में करू अतिक्रमण 
पर आने ना दूं किसी को अपनी दुनिया में 
क्योंकि बातों से ही घिर, गिर और फिर उठ जाता हूँ 
कभी अपनी तो दूसरों कि नजरो से
 मैं और मेरी बातें व्यस्त  है अपने द्वंद में
अपने अंतर्द्वंद में.....
क्योंकि  संघर्ष सदियों से जारी  है
 अंदरूनी प्रतिद्वंदता से.....




मेरी तो बहुत सुनी
 अब शहरयार साहिब की सुनते है
 http://www.youtube.com/watch?v=FyoKDxbbhIs&feature=related

2 टिप्‍पणियां:

ZEAL ने कहा…

मैं कुछ नहीं
ना मेरी कोई औकात और ना कोई बिसात
एक निमित मात्र सा प्राणी मैं
अपनी दुनिया का अकेला वासी
जो इसके केंद्र में भी और परिधि में भी
अपकेन्द्रिय और अभिकेन्द्रीय बलों दोनों के जद में
गतिज भी और स्थतिज भी....

वाह !..गंभीर वैज्ञानिक और आध्यात्मिक चिंतन....

.

globalfakir ने कहा…

thanks ZEAL for comment and appreciation

regds