बातों का क्या है
ये कह दिया और वो कह दिया
उनको और इनको
पर मेरी ही बात मुझसे कहे, तू क्या है?
और क्या तेरी बिसात....
मैं विश्वास तुझ पे करू
सच्चा तुझे मानू या झूठा
बात की बातें सच्ची है
मैं कुछ नहीं
ना मेरी कोई औकात और ना कोई बिसात
एक निमित मात्र सा प्राणी मैं
अपनी दुनिया का अकेला वासी
जो इसके केंद्र में भी और परिधि में भी
अपकेन्द्रिय और अभिकेन्द्रीय बलों दोनों के जद में
गतिज भी और स्थतिज भी
बात की बातों की तरह
कभी उलझा और कभी सुलझा
कभी उलझा और कभी सुलझा
मन करे तब दुसरो की दुनिया में करू अतिक्रमण
पर आने ना दूं किसी को अपनी दुनिया में
क्योंकि बातों से ही घिर, गिर और फिर उठ जाता हूँ
कभी अपनी तो दूसरों कि नजरो से
मैं और मेरी बातें व्यस्त है अपने द्वंद में
अपने अंतर्द्वंद में.....
क्योंकि संघर्ष सदियों से जारी है
अंदरूनी प्रतिद्वंदता से.....
मेरी तो बहुत सुनी
अब शहरयार साहिब की सुनते है
http://www.youtube.com/watch?v=FyoKDxbbhIs&feature=related
अब शहरयार साहिब की सुनते है
http://www.youtube.com/watch?v=FyoKDxbbhIs&feature=related
2 टिप्पणियां:
मैं कुछ नहीं
ना मेरी कोई औकात और ना कोई बिसात
एक निमित मात्र सा प्राणी मैं
अपनी दुनिया का अकेला वासी
जो इसके केंद्र में भी और परिधि में भी
अपकेन्द्रिय और अभिकेन्द्रीय बलों दोनों के जद में
गतिज भी और स्थतिज भी....
वाह !..गंभीर वैज्ञानिक और आध्यात्मिक चिंतन....
.
thanks ZEAL for comment and appreciation
regds
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