गली, मोहल्ले
बंद गली में बंद हूँ
जाने का रास्ता है तो है
पर निकलने का नहीं
पर चुनी तो खुद ही, ये गली
मैंने भी और बाकि सबने भी
गली के उस पार, है बहुत से लोग
अपने भी, पराये भी और कुछ जाने पहचाने अनजान
वो सब भी बंद है अपनी अपनी गलियों और मुहल्लों में
उनकी गली भी मेरी तरह है (मुहल्ले वाले तो खुश है ना )
हांजी हाँ बंद है एक तरफ से
मन करता है, मिलना है उनसे, बाते करनी है
कम्युनिकेसन का युग है आजकल, और फिर
मैं भी सामाजिक हूँ न
हूँ भी या फिर गली की घुटन का असर है
पर गलियों के भी अपने रूल रेगुलेशन है
कोई इधर वाला उधर नहीं होता
दिखने में बाहर से तो गलिया बंद है
पर मन के मोहल्ले मिले है आपस में
पता नहीं कोन कहाँ का, और किसका
अतिक्रमण कर चुका है, या कर रहा है
बाहर से देख के लगता है
एक सीजफायर सी स्थिति है
जहाँ हर कोई अपनी अपनी गली के मोर्चे पर मुस्तैद खड़ा है
पर मन से कहीं और मिला हुआ है
कहाँ ? ये तो गली वाले ही जाने....
अरे गली में कुछ खिडकिया ही खोल लो.....
हवा आये ताजी इधर उधर....
तभी गली में गुलजार का लिखा गाना बजा....
रात के ढाई बजे....कोई शहनाई बजे....दिल का बाजार लगा
दिल ने कैसी दुर्गत की....पहली बार मुहबब्त की है
अजी आखिरी बार मुहब्बत की है (गुलज़ार साहब भी तंग आगये है)
2 टिप्पणियां:
Awesome!
Bohot khushi hui jaan-kar ki aap itna sunder likhte hain :-) Gali-mohollon ka kya hai, roz nayi galiyaan ban jati hain...Jab tak dil milte hain, ek telepathy see rehti hai logo ke bich, chahhe kitni hee galiyon ka fasla kyu na ho...
Duniya ke niyam ajeeb se hain...But kya kare, ye niyam bhi to mohalle me rehne vale logon ne hee banaye hain
Loved being here...Rocking Blog!
thanks!
for putting comment on my blog....
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