चाँद पे रहते है लोग
अच्छे भी और बुरे भी
रात की रूमानी रोशनी में गौर से देखो तो
कुछ लोगो को दिखते है
कभी कभी आते है यहाँ सैर करने, घुमने
खूब चाँद की बाते बताते है
यहाँ की सुनते है और एक दिन
फिर वो ही अमावस के दिन चले जाते
कहते है कि तुम लोग बड़ा अँधेरा रखते हो
और हमें अँधेरे से सख्त नफरत है,
गुस्से में कहते है कि
हमारे चाँद में ऐसा नहीं है
वहां तो चांदनी नाम की एक लडकी है
जिसके रूप के तेज से सब कुछ रोशन है
ये अमावस, पूनम तो तुम्हारे यहाँ होती है
वहम है तुम लोगो का, मन बहलाने के लिए
चांदनी रूठे तो काली अमावस नहीं तो पूनम
चाँद वालो की बाते सुन कर सोचता हूँ
फिर ये 116 चाँद की रातों का चक्कर क्या है
पता नहीं चाँद की जमीन कैसी होगी
पहाड़ होंगे कि रेगिस्तान होगा पर
सुना है वहां के लोग हवा में उड़ते है
इधर से उधर जिधर मन किया
और जिधर की हवा चले, चले जाते है
कोई जुडाव नहीं सिर्फ और सिर्फ उड़ाव
पहले तो वहीं से लोग आते थे
अब विज्ञान की तरक्की से
हमारे यहाँ के कुछ लोग भी कभी कभी
चाँद पे चले जाते है
पर वापस आके वहां की असल बात कोई नहीं बताता
चांदनी की तारीफ करते रहते है
और अजीब सी मदहोशी में सूफियाना मस्त हो जाते है
चाँद कैसा है और वहां के लोग कैसे है
ये नहीं बताते, शायद मिले हुए है चाँद वालो से
जिस दिन मै जाऊंगा
सब कुछ पता करके आऊंगा
या क्या पता मैं भी?
Dedicated to Neha jee...
1 टिप्पणी:
It really is an honour that you wrote a poem dedicated to me.. Thanks a lot.. :)
एक टिप्पणी भेजें