जहाँ होता हूँ, वहां नहीं होता
और जैसा होता हूँ, वैसा नहीं होता
है ऐसी ही फितरत मेरी,
इसलिए तो लोग कहते है
अब तो अस्तित्व ही खतरे में है
क्योंकि रोज की तुलनात्मक भागम भाग में
हमेशा ही या तो एक कदम आगे रहा या पीछे
और इसी उधेड़बुन में अब
ऐसी दुनिया में आ गया हूँ
जहाँ के सारे जीव ही
प्राकृतिक रूप से सरंक्षित घोषित है
प्राकृतिक रूप से सरंक्षित घोषित है
हालाँकि कोशिशे बहुत है
हम लोगो को बचाने की
पर कुछ लोगों की ईमानदार कोशिशो पे शक है
और कुछ हमें भी मरने का शौक है
1 टिप्पणी:
Nice.. :)
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